पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचारों में
- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने नई दिल्ली में LEAPS अवार्ड्स 2025 के विजेताओं को सम्मानित किया और LEADS 2025 रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।
भारत के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य का अवलोकन
- भारतीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ रूप से बढ़ रही है, जिसे प्रमुख क्षेत्रों में पुनरुद्धार और बेहतर आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन प्राप्त है।
- लॉजिस्टिक्स क्षेत्र व्यापार, विनिर्माण और सेवाओं को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारत ने 2023 में लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग में सुधार करते हुए 38वाँ स्थान प्राप्त किया, जो 2018 से छह स्थान बेहतर है। यह क्षेत्र के आधुनिकीकरण में प्रगति को दर्शाता है। भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष 25 में पहुँचना और लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 10% से नीचे लाना है।

कुशल लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के लाभ
- आपूर्ति श्रृंखला दक्षता: लॉजिस्टिक्स एक सुचारु और कुशल आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करता है, जिससे विलंब कम होते हैं तथा लीड टाइम घटता है।
- यह दक्षता व्यवसायों को उपभोक्ता मांग को शीघ्रता से पूरा करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने में सहायक है।
- कनेक्टिविटी और पहुँच: लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विभिन्न क्षेत्रों और बाजारों को जोड़ते हैं।
- यह कनेक्टिविटी आर्थिक एकीकरण में योगदान देती है, जिससे व्यवसाय व्यापक ग्राहक आधार तक पहुँच पाते हैं और राज्यों एवं क्षेत्रों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
- लागत में कमी और प्रतिस्पर्धात्मकता: कुशल लॉजिस्टिक्स संचालन परिवहन, भंडारण और वितरण में लागत कम करते हैं।
- इससे व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है क्योंकि वे बाजार में उत्पादों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध करा सकते हैं।
- रोजगार सृजन: लॉजिस्टिक्स क्षेत्र परिवहन, वेयरहाउसिंग, वितरण और संबंधित सेवाओं में रोजगार प्रदान करता है।
- रोजगार सृजन आय उत्पन्न करने और आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान देता है।
- प्रौद्योगिकी अपनाना: जीपीएस ट्रैकिंग, RFID और उन्नत एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग परिचालन दक्षता बढ़ाता है, लागत घटाता है और उत्पादकता में सुधार करता है।
- आर्थिक एकीकरण: विकसित लॉजिस्टिक्स क्षेत्र विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों को जोड़कर वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को सक्षम बनाता है।
- यह एक सुदृढ़ और परस्पर जुड़ी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
- उच्च लॉजिस्टिक्स लागत: सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण भारत की लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक औसत से अधिक है, जिससे ईंधन खपत और परिचालन व्यय बढ़ते हैं।
- क्षेत्र का विखंडन: अधिकांश लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर असंगठित हैं और मानकीकरण की कमी से अक्षमताएँ एवं विलंब उत्पन्न होते हैं।
- अवसंरचना बाधाएँ: भीड़भाड़ वाले बंदरगाह, कमजोर अंतिम-मील कनेक्टिविटी और अपर्याप्त वेयरहाउसिंग अवसंरचना अभी भी विद्यमान हैं।
- प्रौद्योगिकी और कौशल अंतराल: डिजिटल तकनीकों जैसे ट्रैकिंग और ऑटोमेशन का असमान उपयोग तथा कुशल पेशेवरों की कमी दक्षता को प्रभावित करती है।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: लॉजिस्टिक्स में डीजल के भारी उपयोग से CO₂ उत्सर्जन बढ़ता है और हरित व विद्युत परिवहन को धीमी गति से अपनाना स्थिरता में बाधा डालता है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- समर्पित मालवाहक गलियारे (DFCs): जीएसटी और अवसंरचना दर्जा जैसे सुधारों से दक्षता बढ़ी है और विलंब कम हुए हैं।
- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हावड़ा जैसे प्रमुख केंद्रों को जोड़ने वाले उच्च गति रेल मार्ग मालवाहन की गति और विश्वसनीयता बढ़ाते हैं।
- मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs): भारत सड़क, रेल और वायु परिवहन को एकीकृत कर वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज एवं कस्टम सेवाओं जैसी उन्नत सुविधाओं के साथ MMLPs विकसित कर रहा है।
- परिवहन पोर्टल: परिवहन पोर्टल, SARATHI और VAHAN ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण सेवाओं का डिजिटलीकरण करते हैं।
- mParivahan ऐप के माध्यम से एकीकृत होकर यह प्रशासन को सरल बनाते हैं।
- ई-वे बिल: जीएसटी के तहत ई-वे बिल ₹50,000 से अधिक मूल्य के माल के लिए आवश्यक डिजिटल दस्तावेज है।
- यह कागजी कार्यवाही कम करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और अंतरराज्यीय परिवहन को सरल बनाता है।
- गति शक्ति (2021): राष्ट्रीय मास्टर प्लान के माध्यम से बहु-एजेंसी अवसंरचना योजना को एकीकृत कर लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने और लागत घटाने का लक्ष्य।
- यह बहु-मोडल कनेक्टिविटी, तेज परियोजना निष्पादन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022): एकीकृत लॉजिस्टिक्स प्रणाली बनाने और MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए सिंगल-विंडो ई-लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म की स्थापना।
- लॉजिस्टिक्स दक्षता संवर्द्धन कार्यक्रम (LEEP): बेहतर अवसंरचना, तकनीक और ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से परिवहन समय और लागत घटाकर मालवाहन दक्षता बढ़ाना।
- मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047: बंदरगाहों का विस्तार, डिजिटलीकरण के माध्यम से दक्षता सुधार, हरित पहल को बढ़ावा, जहाज निर्माण, पर्यटन और कौशल विकास।
- यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP): विभिन्न सरकारी विभागों के डेटा को एकीकृत कर पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- जीएसटी: अंतरराज्यीय चेकपॉइंट हटाकर, करों को सरल बनाकर और परिवहन दक्षता में 33% से अधिक सुधार कर माल की आवाजाही को सुगम बनाया।
- LEADS रिपोर्ट: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।
- इसमें अवसंरचना, सेवाएँ, नियामक वातावरण और स्थिरता शामिल हैं, जिससे नीतिगत और निवेश संबंधी निर्णयों को दिशा मिलती है।
LEADS 2025 रिपोर्ट
- इसे पुरस्कारों के साथ जारी किया गया, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन के आधार पर संशोधित चार-स्तरीय वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया।
- नया चार-स्तरीय वर्गीकरण इस प्रकार है:
- उदाहरणीय : उदाहरणीय श्रेणी में वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं जो नीति, अवसंरचना, सेवा प्रदायन और नियामक आयामों में निरंतर उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं।
- उच्च प्रदर्शनकर्ता उच्च प्रदर्शनकर्ता वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जो अधिकांश प्रदर्शन संकेतकों में सुदृढ़ एवं सुसंगत परिणाम प्रदर्शित करते हैं।
- त्वरक : त्वरक श्रेणी में वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आते हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय सुधार गति और स्पष्ट सुधार-उन्मुख दृष्टिकोण प्रदर्शित किया है।
- विकास-प्रयासी : विकास-प्रयासी वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जो लॉजिस्टिक्स प्रणाली विकास एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण के प्रारंभिक चरण में हैं।

निष्कर्ष
- भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र नीतिगत समर्थन, अवसंरचना वृद्धि और डिजिटलीकरण से प्रेरित होकर एक बड़े परिवर्तन से गुजर रहा है, किंतु वैश्विक मानकों तक पहुँचने के लिए अभी भी सुधारों की आवश्यकता है।
- भारत को एक अग्रणी लॉजिस्टिक्स हब बनने के लिए बहु-मोडल परिवहन को सुदृढ़ करना होगा, जिसमें मालवाहन को सड़क से रेल और जलमार्गों की ओर स्थानांतरित करना तथा एकीकृत लॉजिस्टिक्स पार्क एवं मालवाहक गलियारे विकसित करना शामिल है।
- लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए दक्षता में सुधार, डिजिटल योजना, कराधान को सरल बनाना और पारगमन विलंब को घटाना आवश्यक है।
- डिजिटल अवसंरचना का विस्तार और एआई, IoT तथा डेटा एनालिटिक्स का उपयोग आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक अनुकूलित कर सकता है।
- इसके अतिरिक्त, विद्युत मालवाहन वाहनों, तटीय शिपिंग, अंतर्देशीय जलमार्गों और कार्बन-कुशल प्रथाओं के माध्यम से हरित लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देना अनिवार्य है।
- कौशल विकास और कार्यबल का औपचारिककरण, साथ ही विखंडित ऑपरेटरों का एकीकरण, एक अधिक कुशल एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहायक होगा।
स्रोत :PIB
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